चलता रह राही

चलता रह राही, रुकना न तू,
ये मंजिल है तेरी, इस से डरना न तू|
रख भरोसा खुद पे, हर डगर आसान है,
माना फूल नहीं इसमें,
शायद काटों में चलकर ही, तेरी पहचान है|
आज है मुश्किल, इसलिए कल का इंतज़ार है
पा ले अपना मुकांम,
फिर तो दुनिया भी मेहरबान है|
ये सफ़र है तेरा, चलना अकेले तुझे पड़ेगा
हर कठनाई के आगे
निकलना तुझे पड़ेगा|
आयेगा वो दिन …
जब मंजिल तेरे हाथ होगी
क्यों कि लहरों से डरकर
नौका पार नहीं होती|
चलता रह राही, रुकना न तू,
ये मंजिल है तेरी, इस से डरना न तू|
– प्रेरिका

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